01
Date: 25/03/2026
Self Sacrifice
कुर्बानी
आज फिर मैंने खुद के खिलाफ गवाही दी
यूँ काली कोठरी से दूर, अपने चाहत की कुर्बानी दी
आज फिर आईने ने मुझे पहचानने से इनकार कर दिया
फिर भी इन आँखों ने, नज़रे फेरने की सलामी दी
कुछ पूछना चाहता हूँ, कि क्या है इन लकीरों के आगेी
पर ना तेरे लफ्ज खुले, और ना ये समाज ने मुझे इजाज़त दी
यूँ तो हजार किस्से हैं तेरे, जिसे सुनाने को है सब बेताबा
पर तेरे एक कहने पे, लो मैंने अपने ज़ुबान की कुर्बानी दी ा
02
Date: 28/11/2025
For Girls life
एक सुबह मैं वहां मिलूंगी
जहाँ मासूमियत का मुखौटा बिकता है
जहाँ अपने ही वजूद से दूर भागती हूँ
जहाँ किताबों से मुझे इश्क है
और जहाँ गलतियों से नफरत
एक सुबह, मैं वहाँ मिलूँगी
जहाँ मुझे सफेद रंग से पहचाना जाएगा
जहाँ समाज से मुझे दूर रखा जाएगा
जहाँ कोई मुझे रोक नहीं सकता
मैं वहीं साक्षी हो जाऊँगी
प्रीतम का चोला पहन मैं दासी हो जाऊँगी
एक सुबह, मैं वहाँ मिलूँगी
03
Date: 11/10/2025
My personal life
क्यों
क्यों उड़ रहे हैं बुलबुले बनकर
मेरे लबों पर आए शब्द
क्यों इन आँखों में अब भी एक परछाई है,
क्यों चमक रहे लोग रंग-रेलियाँ करते,
क्यों झूठे लोगों की बातों में सच्चाई है,
क्यों अवसर बोलने वाला बेजुबान है,
और क्यों अवसर हँसने वाला देवदास,
क्यों लोगों के लबों पर काँटे हैं,
और क्यों मेरे लबों पर बेजुबानी...
04
Date: 18/09/2025
Revenge on a girl
एक खून का छींटा
तू तो चलो गई लाल जोड़े में पर याद रख
इन खामोशियों की भी एक कीमत है
तेरी खुशियों पर मेरी खामोशी की चेतावनी होगी
तेरे घर के हर कोने में मेरा नाम अंधेरा बनकर डूबेगा
तू आज जश्न मना कल मैं बर्बादी लाऊंगा
तेरी लाल साड़ी पर एक खून का छींटा होगा
05
Date: 03/09/2025
My Broken Promises
मैं भी कितना झूठा हूँ
नफ़रत है मुझे इन परछाइयों से
देख मैं कितना रूठा हूँ
करके हजार वादे खुद से पर निभा ना पाया
देख मैं भी कितना झूठा हूँ
06
Date: 26/05/2025
Social Issue
समाज
किसी ने मुझसे पूछा कि
ये समाज क्या है?
तो मैंने कहा
रेत की तरह उड़ते हर चीज़ को देखने वाले
पानी की बूंद सी नरम, पर कठोर पत्थर रखने वाले
जो हर पल अपना कहके, साथ में खंजर रखने वाले
वो दोगले समाज है ये
जिसने ना मुझे समझा ना मेरे दर्द और फरियाद को
हर चीज छीना मुझसे जैसा जलता छोड़ दिया शमशान को
जो हर पल खफा करता है मेरे दर्द पे हँसा करता है
वो दोगले समाज है ये
जिसने किसी की मर्जी छीनी तो किसी की चाहत
आगोश में पड़ा रहा फिर भी ना मिली राहत
जो कहते हैं अपने पर अपनों से ही छीनने वाले
वो दोगले समाज है ये
07
Date: 27/03/2025
Reality Check
धलती हुई उम्र
शुरुआत जैसे हो चुकी है, उन टूटे फूटे रास्तों की
जब सच्चे दोस्त भी साँप लगने लगे हैं
ज़िंदगी के उस दौर में हूँ जब लड़के मर्द बनने लगे हैं
संगीतों का असर कुछ ऐसा है छाया
जब सब नए नए रैप और हिपहॉप गानों पे झूम रहे हैं
वहीं अब 90 के गाने भी अच्छे लगने लगे हैं
पहले न इज्जत की परवाह, न चिंताओं की कहानी थी
पहले हर खेल सुहाना था, और हर दिल मस्तानी थी
पर अब दुनिया में हम भरोसे और ईमानदारी ढूंढने लगे हैं
अब ढलती उम्र ने ऐसा सिखाया कि इस दिल को पैसे अच्छे लगने लगे हैं
बदलने लगी मेरी सोच, बदलने लगी मेरी कहानी
कैसा होगा मेरा भविष्य, यही सोचता, हर रात मुँह-ज़ुबानी
08
Date: 23/12/2024
My personal life
सौदागर
आज डर गया मैं
खुद ही की परछाइयों को देखकर जैसा भ्रम सा लगा कि पीछे कोई है
और जब पीछे देखा,
तो सौदागर हैं जिन्होंने अपने सौदों के हिस्सों को खोए हैं।
कोई दोस्ती का सौदा मांग रहा, जिन्हें मैंने नज़रअंदाज़ किया
कोई समय का सौदा मांग रहा, जिसे मैंने अपनी बर्बादी में खोया है
कोई खून का हिसाब मांग रही, जो मेरे लिए खुद भूखी होकर
रातों को भूखे पेट सोई है
अब तो कमरे की हर दीवारें भी कहने लगी हैं
क्या तू सच में कर पाएगा
सुना है आँधी चलती है
पर ठहर भी जाती है
तू बता, क्या तू हमेशा के लिए आँधी लाएगा